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Toggleहाथरस: कॉलेज प्रोफेसर पर गंभीर आरोप, छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार का मामला उजागर
हाथरस:
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बागला डिग्री कॉलेज से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कॉलेज के एक प्रोफेसर पर आरोप है कि वह छात्राओं को पास कराने और नौकरी दिलाने के नाम पर अनुचित दबाव डालता था। पुलिस जांच में उसके मोबाइल से कई आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं, जिनके आधार पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।
जैसे ही यह मामला सामने आया, कॉलेज प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस ने प्रोफेसर के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और उसकी गतिविधियों की विस्तृत जांच की जा रही है।
कैसे हुआ खुलासा?
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब कुछ वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुईं। बताया जा रहा है कि प्रोफेसर के मोबाइल से ये सामग्री लीक हो गई थी, जिसके बाद मामला चर्चा में आया।
इससे पहले भी कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अब जब प्रमाण सामने आए हैं, तो प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है।
दरअसल, 6 मार्च को एक छात्रा ने महिला आयोग को पत्र लिखकर फोटो और वीडियो भी भेजे थे। शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने आंतरिक जांच शुरू की। 13 मार्च को इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने खुद थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद यह मामला खबरों में आया। आनन-फानन में डीएम ने जांच के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। आरोपी प्रोफेसर डॉ. रजनीश की उम्र 54 साल है। वह भूगोल विषय पढ़ाते हैं।
छात्रा का पत्र पढ़े…
“मैं आपको बताना चाहती हूं कि प्रोफेसर रजनीश कुमार कई छात्राओं का यौन शोषण कर रहे हैं। वह एक पागल जानवर है। वह छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करता है। वह वीडियो बनाकर उनका शोषण करता है। मैं पिछले एक साल से प्रधानमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री कार्यालय में इसकी शिकायत कर रही हूं। लेकिन प्रोफेसर इतने शक्तिशाली हैं कि उनके खिलाफ किसी भी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई। मोदी सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का समर्थन करती है, लेकिन फिर भी ऐसे क्रूर लोग लड़कियों पर बेखौफ होकर अत्याचार कर रहे हैं। मैं इस जानवर से इतनी परेशान हो गई हूं कि कभी-कभी मुझे आत्महत्या करने का विचार आता है। कॉलेज प्रबंधन समिति के अध्यक्ष और प्रबंधन को प्रोफेसरों की हरकतों के बारे में सूचित किया गया। उन्हें सबूत भी दिए गए, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब तक इस खलनायक पर कार्रवाई नहीं हो जाती, मैं हार नहीं मानूंगी।
पुलिस जांच में क्या मिला?
पुलिस ने प्रोफेसर के मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों को जब्त कर लिया है और उनकी जांच की जा रही है।
- कई वीडियो और चैट रिकॉर्ड बरामद हुए हैं, जिनमें कुछ छात्राओं से बातचीत के सबूत मिले हैं।
- कुछ सामग्री इंटरनेट पर भी साझा की गई थी, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।
- छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
प्रोफेसर पर क्या आरोप हैं?
- छात्राओं को अच्छे नंबर देने या नौकरी दिलाने का आश्वासन देना।
- कॉलेज परिसर में अनुचित गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दबाव बनाना।
- डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर अनुचित सामग्री संकलित करना।
- शिकायत करने वाली छात्राओं को धमकी देने की भी बात सामने आई है।
सीएम योगी का सख्त रुख
यह मामला जैसे ही चर्चा में आया, उत्तर प्रदेश सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
- कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह मामले की गहन जांच करे और सभी पीड़ित छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।
- पुलिस विभाग को आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने और निष्पक्ष जांच करने के लिए विशेष टीम गठित करने का आदेश दिया गया है।
- महिला आयोग ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
इस मामले के बाद से कॉलेज की छात्राओं में डर और आक्रोश है।
- कई छात्राओं ने आगे आकर अपनी आपबीती साझा की।
- कुछ छात्राओं का कहना है कि उन्होंने पहले भी प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन उनकी आवाज दबा दी गई।
- अब जब मामला सार्वजनिक हुआ है, तो वे निष्पक्ष जांच और आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
पुलिस की कार्रवाई और कानूनी धाराएं
पुलिस ने आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें शामिल हैं:
- IPC की धारा 354 (छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार)
- IPC की धारा 506 (धमकी देने का अपराध)
- आईटी एक्ट की धारा 67A (डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग)
इसके अलावा, अन्य संबंधित धाराओं को भी शामिल किया गया है और मामले की गहन जांच जारी है।
प्रोफेसर अब तक फरार, गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीम गठित
जैसे ही पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की, आरोपी प्रोफेसर फरार हो गया।
- पुलिस ने तीन विशेष टीमों का गठन किया है, जो उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
- आरोपी के बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच की जा रही है।
- पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि अगर उनके पास कोई और जानकारी हो, तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें।
जनता और संगठनों की नाराजगी
इस घटना के बाद स्थानीय संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।
- भारतीय किसान यूनियन और कई सामाजिक संगठनों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की है।
- अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है।
- महिला संगठनों ने प्रशासन से कॉलेजों में सुरक्षा बढ़ाने और कड़े नियम लागू करने की मांग की है।
क्या कह रहा है कॉलेज प्रशासन?
कॉलेज प्रशासन ने आरोपी प्रोफेसर को तत्काल निलंबित कर दिया है और मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है।
- कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि अगर आरोपी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- छात्राओं की सुरक्षा के लिए नए दिशानिर्देश लागू किए जा सकते हैं।
- कॉलेज प्रशासन मामले को लेकर सरकार और पुलिस प्रशासन के साथ पूरी तरह सहयोग कर रहा है।
प्रशासन की लापरवाही से बढ़ता अपराध और जनता का आक्रोश
अगर पुलिस ने छात्रा की पहली शिकायत पर ही कार्रवाई कर दी होती, तो कई मासूम लड़कियों को इस घिनौने कृत्य का शिकार होने से बचाया जा सकता था। यह घटना केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही का भी प्रमाण है। जब कोई पीड़िता हिम्मत जुटाकर अपनी आपबीती बताती है और न्याय की गुहार लगाती है, तो उसका कर्तव्य होता है कि उसे तुरंत सुरक्षा दी जाए और आरोपी पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो।
लेकिन इस मामले में, छात्राओं की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, जिससे आरोपी को अपने अपराधों को और अंजाम देने का मौका मिल गया। यह सिर्फ एक कॉलेज का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज में ऐसे अपराधियों को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था का उदाहरण है।
इस तरह की घटनाओं से सामान्य जनता का पुलिस और प्रशासन पर से भरोसा टूटता है। लोग महसूस करने लगते हैं कि न्याय केवल प्रभावशाली लोगों के लिए है, आम नागरिकों के लिए नहीं। इससे समाज में अपराधियों का मनोबल बढ़ता है और पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद धुंधली हो जाती है।
अब सवाल यह है कि कब तक ऐसी लापरवाही चलती रहेगी? प्रशासन को चाहिए कि वह इस तरह की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करे, ताकि किसी और निर्दोष को इस तरह की स्थिति से ना गुजरना पड़े।
निष्कर्ष: न्याय की उम्मीद
यह मामला छात्राओं की सुरक्षा और उच्च शिक्षा संस्थानों में नैतिकता के सवाल खड़े करता है।
- आरोपी लंबे समय से अनुचित गतिविधियों में संलिप्त था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- छात्राओं की शिकायतों को नजरअंदाज किया गया, जिससे मामला और बिगड़ गया।
- अब जब प्रमाण सामने आए हैं, तो प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वे निष्पक्ष जांच कर न्याय सुनिश्चित करें।
अब पूरा देश इस मामले में त्वरित कार्रवाई और आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग कर रहा है। देखना होगा कि उत्तर प्रदेश पुलिस और योगी सरकार कितनी जल्दी इस मामले को सुलझाते हैं और न्याय दिलाने में सफल होते हैं।